YORKTOWN, Va. — भू-राजनीति नामक खेल ने आज तक जितनी अविश्वसनीय पारियां देखी हैं, यह उन सबसे ऊपर जा बैठी। किसानों और लोहारों और आम तौर पर अक्खड़ आदमियों की एक अनरैंक्ड विस्तार-फ़्रैंचाइज़ी ने शनिवार को प्रबल दावेदार ब्रिटिश रेडकोट्स को निपटाकर कॉन्टिनेंटल चैंपियनशिप अपने नाम कर ली। इस उलटफेर के बाद London के सट्टेबाज़ 'ओवर' की भरपाई के लिए हाथ-पांव मारने लगे। बहीखातों की सबसे भारी व्हेल King George III ने रेडकोट्स पर पूरा एक महाद्वीप माइनस लगा रखा था। अब उनके सामने दिवालियापन है, अविश्वास प्रस्ताव है, और फ़्रांसीसी प्रतिद्वंद्वियों की ठेंगा-नुमाइश भी।
रेडकोट्स साम्राज्य-लीग में अपराजित उतरे थे, और उनकी जीत की लय क़रीब पौन सदी पुरानी थी। मैदान से वे औपचारिक विरोध-पत्र दाख़िल करते हुए निकले। सबसे बड़ा ठीकरा रेफ़री पर फूटा, जिन्होंने पेनल्टी देने से ही मना कर दिया। US क्रांतिकारियों ने नियम-पुस्तिका का हर नियम बार-बार तोड़ा। कंधे-से-कंधा वाली दो-पंक्ति फ़ायरिंग उन्होंने ठुकरा दी, और बातचीत-भर की दूरी से दागी जाने वाली सामूहिक बौछारें भी। वे तो कायरों की तरह आड़ में भी छिपे रहे, और बेहतर पहुंच वाली लंबी राइफ़लों से अफ़सरों को चुन-चुनकर गिराते रहे। उन राइफ़लों से निशाना सचमुच लगता था। नन्ही मस्कट-गोलियों और संगीनों का सम्मानजनक रास्ता उन्हें रास ही नहीं आया। "निरा बर्बरपन," हेड कोच Thomas Gage ने शिकायत की। "ये लोग सीधी क़तार में खड़े होकर भद्र पुरुषों की तरह गोली तक नहीं खा सकते। खेल ऐसे नहीं खेला जाता।"
वह गोली जो पूरी लीग में गूंजी
रेडकोट्स ने शुरुआती टॉस जीतकर पहले आक्रमण चुना। क्रांतिकारियों की स्पेशल टीमें, जिन्हें घरेलू अंदाज़ में उनके Minute Men कहा जाता है, बेरहम धुनाई झेलकर अपने शुरुआती इलाक़े में दूर तक पीछे हट गईं। रेव्स की बाज़ी तब पलटी जब उनके मुख्य दल को ऊंची ज़मीन और मुफ़ीद हवा मिल गई। सामने जेट-लैग से चूर रेडकोट्स थे, जो बड़े मैच से पहले रात भर पार्टी करते रहे थे। Concord का North Bridge जमावड़े की धुरी बन गया, और वहां से उन्होंने रेड्स को 18 मील पीछे धकेल दिया। वहीं मेज़बान टीम पूरी की पूरी मैदान में उमड़ पड़ी और चारों ओर से विश्व-विजेताओं की सच्ची कुटाई करने लगी। अफ़रा-तफ़री में रेफ़री इतने घिर गए कि एक फ़ाउल तक नहीं दे पाए।
रेडकोट्स ने फ़ौरन 'दीर्घ रीप्ले' की मांग की, पर स्मारक-उत्कीर्णन December से पहले आने की उम्मीद नहीं थी।
“ये लोग सीधी क़तार में खड़े होकर भद्र पुरुषों की तरह गोली तक नहीं खा सकते। खेल ऐसे नहीं खेला जाता।” — हेड कोच Thomas Gage
गोरिल्ला युद्ध ने बदल दी खेल की परिभाषा
हमलावर प्रबंधन की खीज तब चरम पर पहुंची जब खुलासा हुआ कि मेज़बान पक्ष का किसी ख़ास ज़मीन के टुकड़े की रक्षा का कोई इरादा ही नहीं है। वे दोपहर भर फ़ील्ड-पोज़िशन छोड़ते रहे, और जैसे ही रेडकोट्स चाय पर बैठते, उसे झट वापस झपट लेते। "इन्हें चाय की भी इज़्ज़त नहीं," फ़ील्ड मार्शल John 'Gentleman Johnny' Burgoyne ने शिकायत की। "कभी थी भी नहीं। ज़्यादातर चाय तो इन्होंने Boston Harbor में उंडेल दी थी। इसीलिए हमें यह युद्ध लड़ना है। चाय के लिए! King George की दावत-मेज़ के लिए! विजय के लिए!"
यह मुक़ाबला पूरे खेल की परिभाषा ही बदल सकता है। यूनानी ढंग का फ़ैलेंक्स-युद्ध क़रीब 2,000 साल से चलन में था। अब उसकी जगह ऐसी टीमें ले रही हैं जो गंदे, हिंसक जानवरों की तरह लड़ती हैं। क्रांतिकारी मैदान पर आपे से बाहर वानरों जैसा बर्ताव करते रहे, और पंडित उनकी पैदल रणनीति को अभी से 'गोरिल्ला युद्ध' कहने लगे हैं।
सदी की सबसे बड़ी साइनिंग
सीरीज़ बराबरी पर अटकी थी और आक्रमण ठप पड़ा था। तब अमेरिकी फ़्रंट ऑफ़िस ने सदी की सबसे बड़ी चाल चली और अंतरराष्ट्रीय बाज़ार के सबसे मुंहमांगे फ़्री एजेंट को साइन कर लिया: फ़्रांस। सौदा 1778 में एक लंबी और महंगी मनुहार के बाद पक्का हुआ। मनुहार की कमान Benjamin Franklin के हाथ में थी, जो फ़्रैंचाइज़ी के चिकनी ज़ुबान वाले घुमंतू एजेंट और Satyr Satire के संस्थापक हैं। इस सौदे से एक नामी नौसेना मिली, मंजी हुई पैदल सेना मिली, और सबसे बढ़कर एक बेतुके आकार का वॉर-चेस्ट मिला।
फ़्रांसीसी प्रबंधन महज़ पंद्रह साल पहले रेडकोट्स से अपनी ही ख़ूनी प्रतिद्वंद्विता हार चुका था। उसने इस साइनिंग को परस्पर लाभकारी, रणनीतिक, और पूरी तरह England को हराने का मामला बताया; क्रम ज़्यादातर उलटा पढ़ें। लीग के भेदियों ने इसे उस सौदे के बाद का सबसे एकतरफ़ा अधिग्रहण बताया, जब एक क्लब को समझ आ गया था कि वह बस आकार में बड़ा होकर विपक्ष से ज़्यादा ख़र्च कर सकता है।
Washington: चोरी-चोरी, ऊपर से चेरी-ज़ोरी
हेड कोच George Washington जितने मैच जीते उससे ज़्यादा हारे, और जितनी बार आगे बढ़े उससे ज़्यादा बार पीछे हटे। कई मौक़ों पर उन्होंने एक भी सिपाही नहीं उतारा, क्योंकि रोस्टर चोटों से भरा पड़ा था। हां, अपना A-गेम वे ज़रूर साथ लाए। यानी बेईमानी। ढेर सारी बेईमानी। आरोपों के जवाब में लीग के प्रचारकों ने बाल-Washington की एक दिल छू लेने वाली कहानी सुना दी, जिसने चेरी का पेड़ काटकर उसके बारे में 'झूठ बोलना सीखा ही नहीं' था। स्काउट इस कहानी को पूरे अभियान की सबसे दिलेर गढ़ंत आंकते हैं। उनका इशारा है कि कोच साहब Mount Vernon में ख़ुद कई सौ फलदार पेड़ पालते हैं, और वृक्ष-संस्कृति के विरुद्ध अपराधों में पुलिस उनसे पूछताछ करना चाहती है।
हालात जब भी बिगड़े, Washington मैदान छोड़ गए। सामने वाले के हटते ही वे दौड़कर वापस आ जाते, और चुराई हुई जीत का दावा ठोक देते। खेल-लेखक ट्रॉफ़ी समारोह तक इसे कायरता कहते रहे, और उसके ठीक बाद प्रतिभा।
1776 सीज़न के बिल्कुल आख़िरी मिनट में हर रोस्टर-अनुबंध New Year's Day को ख़त्म होने जा रहा था। Washington ने Hessian कप्तान Johann Rall के मुंह के ठीक सामने अपना पेटेंट जादुई coup de grâce निकाला। मुंह पर वार, Delaware के पार, और पूरे Trenton का बंटाधार। लीग ने मौसम को खेलने लायक़ नहीं ठहराया था, जिसे Washington ने महज़ शेड्यूल का सुझाव माना। उन्होंने अंधेरे में जमी हुई नदी पार की, ओले-बौछार में नौ मील पैदल मार्च किया, और भोर होते ही Trenton पर धावा बोल दिया। मेहमान टीम उस वक़्त भी छुट्टियों का ख़ुमार उतार रही थी।
आख़िरी सेकंडों में रेडकोट्स को अपनी जीत का इतना पक्का भरोसा था कि Trenton के गढ़ की रखवाली पर उन्होंने नशे में धुत जर्मनों की चौथे दर्जे की टीम बिठा रखी थी। जर्मन क़तार बनाने की कोशिश में ही एक-दूसरे पर लुढ़कते रहे, और बुनियादी मोर्चाबंदी तक भूल बैठे। रेव्स ने घड़ी के आख़िरी 60 सेकंड खींचकर पूरे 90 मिनट कर दिए। काम आईं सर्दियों की मौसम-देरियां, दिल खोलकर लिए गए टाइम-आउट, और एक अनुबंध-बाध्य विज्ञापन-ब्रेक। अकेला विज्ञापन-ब्रेक पूरे दो मिनट चला, जिसमें नगर का ढिंढोरची एक स्थानीय कम्बाइन-डीलरशिप की घोषणाएं पढ़ता रहा। इस जीत के एवज़ में उन्हें अगले सीज़न के नौ सौ Hessian ड्राफ़्ट-पिक दिए गए, इस्तेमाल या सौदेबाज़ी की पूरी छूट के साथ।
घड़ी खपाने की कला
आख़िरी सीटी Yorktown में बजी, जहां रेडकोट्स York नदी से सटाकर दबोच लिए गए थे। दबोचने का काम एक पादयोगवश प्रकट हुई फ़्रांसीसी नौसेना ने पूरा किया। रेडकोट्स के मैनेजर बिना हाथ मिलाए मैदान से निकल गए, और बाद में बीमारी का बहाना बनाकर इसे जायज़ ठहराते रहे।
उपनिवेशियों के सिर खेल का ताज सजा। फ़्रांसीसियों को आगे चलकर वही देश कोसने लगा, जिसके लिए युद्ध क़रीब-क़रीब उन्होंने ही जीता था। 250 साल बाद उन पर घिनौने अमेरिकी व्यंजन ईजाद करने का आरोप लगा, और एक ऐसे राष्ट्रपति को चुनने का भी जो किसी की Lolita रह चुके थे।
Satyr Satire लगभग हमेशा देर से ही बंटता है। इस बार तो पूरी ढाई शताब्दी की देरी से।
